Friday, 17 April 2020

भारत का इतिहास :- स्वतंत्र प्रान्तीय राज्य

स्वतंत्र प्रान्तीय राज्य

जौनपुर

> जौनपुर की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने अपने भाई जौना खाँ की स्मृति में की थी।
> जोनपुर में स्वतंत्र शकी राजवंश की स्थापना मलिक सरवर (ख्वाजा जहान) ने की थी।
> ख्वाजा जहान को मलिक-उस-शक (पूर्व का स्वामी) की उपाधि 1394 ई० में फिरोजशाह तुगलक के पुत्र सुल्तान महमूद ने दी थी।
> जौनपुर के अन्य प्रमुख शासक थे : मुबारकशाह (1399-1482 ई०), शम्सुद्दीन इब्राहिमशाह (1402-1436 ई०), महमूद शाह (1436-51 ई०) और हुसैनशाह (1458-1500 ई०)।
> लगभग 75 वर्ष तक स्वतंत्र रहने के बाद जौनपुर पर बहलोल लोदी ने कब्जा कर लिया।
> शर्की शासन के अन्तर्गत, विशेषकर इब्राहिमशाह के समय में, जौनपुर में साहित्य एवं स्थापत्यकला के क्षेत्र में हुए विकास के कारण जौनपुर को भारत के सीराज के नाम से जाना गया।
> अटालादेवी की मस्जिद का निर्माण 1408 ई० में शर्की सुल्तान इब्राहिम शाह द्वारा किया गया था।
> अटाला देवी मस्जिद का निर्माण कन्नौज के राजा विजयचन्द्र द्वारा निर्मित अटाला देवी के मंदिर को तोड़कर किया गया था।
> जामी मस्जिद का निर्माण 1470 ई० में हसैनशाह शर्की के द्वारा किया गया था ।
> झँझरी मस्जिद 1430 ई० में इब्राहिम शर्की के द्वारा एवं लाल दरवाजा मस्जिद का निर्माण मुहम्मदशाह के द्वारा 1450 ई० में किया गया था।

कश्मीर :

> सूहादेव नामक एक हिन्दू ने 1301 ई० में कश्मीर में हिन्दू राज्य की स्थापना की थी।
> 1339-40 ई० में कश्मीर में शाहमीर के द्वारा प्रथम मुस्लिम वंश की स्थापना की गयी।
> कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक शाहमीर था, जो शम्सुद्दीन शाह मीर के नाम से गद्दी पर बैठा।
> इसने अपनी राजधानी इन्द्रकोट में स्थापित की।
> अलाउद्दीन ने राजधानी इन्द्रकोट से हटाकर अलाउद्दीनपुर (श्रीनगर) में स्थापित की।
> हिन्दू मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़ने के कारण सुल्तान सिकन्दर को बुरतशिकन कहा गया।
> 1420 ई० में जैन-ऊल-आबदीन सिंहासन पर बैठा। इसकी धार्मिक सहिष्णुता के कारण इसे 'कश्मीर का अकबर' कहा गया।
> जैन-ऊल-आवदीन फारसी, संस्कृत, कश्मीरी, तिब्बती आदि भाषाओं का ज्ञाता था । इसने महाभारत एवं राजतरंगिणी को फारसी में अनुवाद करवाया।
> 1588 ई० में अकबर ने कश्मीर को मुगल साम्राज्य में मिला लिया ।

बंगाल :

> इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बंगाल को दिल्ली सल्तनत में मिलाया।
> गयासुद्दीन तुगलक ने बंगाल को तीन भागों में विभाजित किया- लखनीती (उत्तर बंगाल), सोनार गाँव (पूर्वी बंगाल) तथा सतगाँव (दक्षिण बंगाल)।
> 1345 ई० में हाजी इलियास बंगाल के विभाजन को समाप्त कर शम्सुद्दीन इलियास शाह के नाम से बंगाल का शासक बना।
> पांडुआ में अदीना मस्जिद का निर्माण 1364 ई० में सुल्तान सिकन्दर शाह ने करवाया था।
> बंगाल का शासक गयासुद्दीन आजमशाह (1389-1409 ई०) अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध था।
> अलाउद्दीन हुसैन शाह (1493-1518 ई०) ने राजधानी को पांडुआ से गौड़ स्थानान्तरित किया।
> महाप्रभु चैतन्य अलाउद्दीन के समकालीन थे। अलाउद्दीन ने सत्यपीर नामक आन्दोलन की शुरुआत की।
> मालाधर बसू ने अलाउद्दीन के शासनकाल में ही श्रीकृष्ण विजय की रचना कर गुणराजखान की उपाधि धारण की । इनके बेटे को सत्यराजखान की उपाधि दी गई ।
> नासिरुद्दीन नुसरत शाह ने गौड़ में बड़ासोना एवं कदम रसूल मस्जिद का निर्माण करवाया ।

मालवा :

> दिलावर खाँ ने 1401 ई० में माछवा को स्वतंत्र घोषित किया।
> दिलावर का पुत्र अलप खाँ, हशंगशाह की उपाधि धारण कर 1405 ई० में माळवा का शासक बना । इसने अपनी राजधानी को धारा से मांइ स्थानान्तरित किया।
> मालवा में खिलजी वंश की स्थापना महमूद शाह ने का
> गुजरात के शासक बहादुरशाह ने महमूद शाह-द्वितीय को युद्ध में परास्त कर उसकी हत्या कर दी और मालवा को गुजरात में मिला लिया।
> मांडू के किले का निर्माण हुशंगशाह ने करवाया था । इस किले में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है- दिल्ली दरवाजा।
> बाजबहादुर एवं रूपमती का महल का निर्माण सुल्तान नासिरुद्दीन शाह द्वारा करवाया गया था।
> हिंडोला भवन या दरबार हॉल का निर्माण हुशंगशाह के द्वारा करवाया गया था।
> जहाजमहल का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी ने मांडू में करवाया था ।
> कुश्कमहल को महमूद खिलजी ने फतेहाबाद नामक स्थान पर बनवाया था। 

गुजरात :

> गुजरात के शासक राजाकर्ण को पराजित कर अलाउद्दीन ने 1297 ई० में इसे दिल्ली-सल्तनत में मिला लिया  था।
> 1391 ई० में मुहम्मदशाह तुगलक द्वारा नियुक्त गुजरात का सूबेदार जफर खाँ ने 'सुल्तान मुजफ्फरशाह' की उपाधि ग्रहण कर 1407 ई० में गुजरात का स्वतंत्र सुल्तान बना ।
> गुजरात के प्रमुख शासक थे : अहमदशाह (1411-52), महमूदशाह बेगड़ा (1458-1511 ई०) और बहादुर शाह (1526-1537 ई०)।
> अहमदशाह ने असावल के निकट साबरमती नदी के किनारे अहमदाबाद नामक नगर बसाया और पाटन से राजधानी हटाकर अहमदाबाद को राजधानी बनाया।
> गुजरात का सबसे प्रसिद्ध शासक महमूद बेगड़ा था
> महमूद बेगड़ा ने गिरनार के निकट मुस्तफाबाद नामक नगर और चम्मानेर के निकट मुहम्मदाबाद नगर बसाया।
> 1572 ई० में अकबर ने गुजरात को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

मेवाड :

अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 ई० में मेवाड़ के गुहिलौत राजवंश के शासक रत्नसिंह को पराजित कर मेवाड़ को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया।
> गुहिलौत वंश की एक शाखा सिसोदिया वंश मेवाड़ को स्वतंत्र करा लिया।
> राणा कुम्भा ने 1448 ई० में चित्तौड़ में एक विजय स्तंभ की स्थापना की।
> खानवा का युद्ध 1527 ई० में राणा सौगा एवं बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर विजयी हुआ।
> 1576 ई० में हल्दीघाटी का युद्ध राणा प्रताप एवं अकबर के बीच हुआ, जिसमें अकबर विजयी हुआ।
> मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़गढ़ थी। जहाँगीर ने मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में मिला लिया ।

खानदेश :

> तुगलक वंश के पतन के समय फिरोजशाह तुगलक के सूबेदार मलिक अहमद राजा फारुकी ने नर्मदा एवं ताप्ती नदियों के बीच 1382 ई० में खान देश की स्थापना की।
> खान देश की राजधानी बुरहानपुर थी। इसका सैनिक मुख्यालय असीरगढ़ था ।
> 1601 ई० में अकबर ने खानदेश को मूगल साम्राज्य में मिला लिया।

सूफी आन्दोलन :

> जो लोग सूफी संतों से शिष्यता ग्रहण करते थे, उन्हें मुरीद कहा जाता था ।
> सूफी जिन आश्रमों में निवास करते थे, उन्हें खानकाह या मठ कहा जाता था।
> सूफियों के धर्मसंघ बा-शारा (इस्लामी सिद्धान्त के समर्थक) और वे शारा (इस्लामी सिद्धान्त से बैंधे नहीं) में विभाजित थे ।
> भारत में चिश्ती एवं सुहराबर्दी सिलसिले की जड़े काफी गहरी थीं। 1192 ई० में मुहम्मद गौरी के साथ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भारत आए। इन्होंने यहाँ चिश्ती परम्परा की शुरुआत की । चिश्ती परम्परा का मुख्य केन्द्र अजमेर था।
> चिश्ती परम्परा के कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण संत थे-निजामुद्दीन औलिया, बाबा फरीद, बख्तियार काकी एवं शेख बुरहानुद्दीन गरीब। बाबा फरीद बख्तियार काकी के शिष्य थे।
> बाबा फरीद की रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं।
> बाबा फरीद के दो महत्त्वपूर्ण शिष्य थे- निजामुद्दीन औलिया एवं अलाउद्दीन साबिर।
> हजरत निजामुद्दीन औलिया ने अपने जीवनकाल में दिल्ली के सात सुल्तानों का शासन देखा था। इनके प्रमुख शिष्य थे-शेख सलीम चिश्ती, अमीर-खुसरो, अमीर हसन देहलवी।
> शेख बुरहानुद्दीन गरीब ने 1340 ई० में दक्षिण भारत के क्षेत्रों में चिश्ती सम्प्रदाय की शुरुआत की और दौलतावाद को मुख्य केन्द्र वनाया।
> सूफियों के सुहरावर्दी धर्मसंघ या सिलसिला की स्थापना शेख शिहाबुद्दीन उमर सुहरावर्दी ने की, किन्तु 1262 ई० में इसके सुदृढ़ संचालन का श्रेय शेख बदरुद्दीन जकारिया को है। इन्होंने सिंध एवं मुल्तान को मुख्य केन्द्र बनाया। सुहरावर्दी धर्मसंघ के अन्य प्रमुख संत थे-जलालुद्दीन तबरीजी, सैय्यद सुर्ख जोश, बुरहान आदि। सुहरावर्दी सिलसिला ने राज्य के संरक्षण को स्वीकार किया था।
> शेख अब्दुल्ला सत्तारी ने सत्तारी सिलसिले की स्थापना की थी। इसका मुख्य केन्द्र बिहार था।
> कादरी धर्मसंघ या सिलसिला की स्थापना सैय्यद अबुल कादिर अल जिलानी ने बगदाद में की थी। भारत में इस सिलसिला के प्रवर्त्तक मुहम्मद गौस थे इस सिलसिले के अनुयायी गाने-क्जाने के विरोधी थे । ये लोग शिया मत के विरुद्ध थे
> राजकुमार दारा (शाहजहाँ का ज्येष्ठ पुत्र) कादिरी सिलसिला के मुल्लाशाह का शिष्य था।
> नक्शबन्दी धर्मसंघ या सिलसिला की स्थापना ख्वाजा उबेदुल्ला ने की थी। भारत में इस सिलसिला की स्थापना ख्वाजा बकी बिल्लाह ने की थी। भारत में इसके व्यापक प्रचार का श्रेय बकी बिल्लाह के शिष्य अकबर के समकालीन 'शेख अहमद' सरहिन्दी को था ।
> फिरदौसी सुहरावर्दी सिलसिला की ही एक शाखा थी, जिसका कार्य क्षेत्र बिहार था । इस सिलसिले को शेख शरीफउद्दीन याह्या ने लोकप्रिय बनाया। याह्या ख्वाजा निजामुद्दीन के शिष्य थे।

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